Sunday, 4 February 2018

दशरथ मांझी – द माउंटेन मैन || Dasharatha Manjhi - The Mountain Man


*दशरथ मांझी – द माउंटेन मैन*

दशरथ मांझी उर्फ़ माउंटेन मैन को आज हर कोई जानता है, कुछ समय पहले आई फिल्म मांझी के द्वारा हर कोई इनके जीवन को करीब से जान पाया है| बिहार के छोटे से गाँव गहलौर का रहने वाला दशरथ ने इतना आश्चर्यजनक कार्य किया है, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था| इन्होंने अपने छोटे से गाँव से शहर तक का रास्ता बनाने के लिए 360 फीट लम्बे, 30 फीट चौड़े व 25 फीट ऊँचे पहाड़ को तोड़ डाला व रास्ता बना दिया|

*जन्म से लेकर जवानी तक का सफ़र:*
दशरथ का जब जन्म हुआ, तब देश अंग्रेजो का गुलाम था, पूरे देश के साथ साथ इस गावं के भी बत्तर हालात थे| 1947 में देश तो आजाद हो जाता है, लेकिन इसके बाद धनि लोगों की गिरफ्त में चला जाता है| हर तरफ अमीर जमीदार अपना हक जमाये रहते हैं और बिना पढ़े लिखे गरीबो को परेशान करते हैं। दशरथ का परिवार भी बहुत गरीब था, एक एक वक्त की रोटी के लिए उसके पिता बहुत मेहनत करते थे।
दशरथ का बाल विवाह भी हुआ था। आजादी मिलने के बाद भी गहलौर गाँव में ना बिजली थी, ना पानी और ना ही पक्की सड़क। उस गाँव के लोगों को पानी के लिए दूर जाना होता था, यहाँ तक की अस्पताल के लिए भी पहाड़ चढ़ कर शहर जाना होता था, जिसमें बहुत समय भी लगता था।

दशरथ के पिता ने गाँव के जमीदार से पैसे लिए थे, जिसे वह लौटा नहीं पाये थे। बदले में वह अपने बेटे को उस जमीदार का बधुआ मजदूर बनने को बोलता है। किसी की गुलामी दशरथ को पसंद नहीं थी, इसलिए वह यह गाँव छोड़कर भाग जाता है। अपने गाँव से दूर वह धनवाद में कोयले की खदान में काम करने लगता है। 7 साल तक वहां रहने के बाद उसे अपने परिवार की याद सताने लगती है और फिर वह गाँव लौट आता है।
1955 के लगभग जब वह गाँव लौटता है, तब भी वहां कुछ नहीं बदलता है। वहां अभी भी, गरीबी, जमीदारी, होती है, वहां ना सड़क, ना बिजली जैसी सुविधा पहुँच पाती है। दशरथ के इस गाँव में छुआ छूत जैसी कुप्रथा भी रहती है। दशरथ की माँ अब तक गुजर चुकी होती है, अपने पिता के साथ वह जीवन बसर करने लगता है। तभी उसे एक लड़की पसंद आती है, ये वही लड़की होती है जिससे उसकी बचपन में शादी होती है। मगर अब लड़की का पिता उसकी बचपन की शादी को नहीं मानता है, क्यूंकि उसके हिसाब से दशरथ कुछ काम धाम नहीं करता है। अपने प्यार की खातिर वह फगुनिया को भगा के ले आता है। दोनों एक अच्छे पति पत्नी की तरह जीवन बिताने लगते है। दशरथ को एक बेटा भी होता है।

1960 में दशरथ की पत्नी एक बार फिर गर्भवती होती है, इस समय दशरथ को पहाड़ के उस पार कुछ काम मिल जाता है। फगुनिया रोज उसे खाना देने जाती है, एक दिन अचानक उसका पैर फिसल जाता है और वह गिर जाती है। दशरथ के गावं में कोई अस्पताल ना होने के कारण वह बड़ी मुश्किल से पहाड़ चढ़ के उसे शहर ले जाता है। जहाँ वह एक लड़की को जन्म देती है लेकिन खुद मर जाती है।
दशरथ इस बात से बहुत आहात होता है और फगुनिया से वादा करता है कि वह इस पहाड़ को तोड़ रास्ता जरुर बनाएगा। 1960 से शुरू हुआ दशरथ का यह प्रण एक हथोड़ी के सहारे था।

*दशरथ मांझी – द माउंटेन मैन कहानी:*
रोज सुबह उठकर दशरथ अपना हथोड़ा उठाये पहाड़ तोड़ने निकल जाता था। वह ऐसे काम करता जैसे उसे इसके पैसे मिलते हो। सब उसे पागल सनकी कहते, लेकिन वह किसी की ना सुनता। इसी वजह से सब उसे पहाड़तोडू कहने लगे थे।
दशरथ के पिता उसे बहुत समझाते थे कि ऐसा करने से उसके बच्चों का पेट कैसे भरेगा, लेकिन वह नहीं सुनता था। किसी तरह कुछ पैसा कमाकर बच्चों का पेट भी भर देता था।
ऐसा करते करते कई साल बीत गए और गाँव में सुखा पड़ जाता है, सब गाँव छोड़ कर जाने लगते है, लेकिन दशरथ नहीं जाता, वह अपने पिता और बच्चों को भेज देता है। इस सूखे की मार में दशरथ को गन्दा पानी व पत्तियां खा कर गुजारा करना पड़ता है।
समय के साथ सूखे के दिन बीत जाते है और सब गाँव वाले लौट आते है। अब भी सब दशरथ को पहाड़ तोड़ता देख आशचर्य चकित हो जाते है।

*1975 – आपातकाल का समय:*
1975 में इंदिरा गाँधी द्वारा लगाई गई इमरजेंसी में पूरा देश प्रभावित हुआ था। सब जगह हाहाकार मचा था। अपनी एक रैली में इंदिरा गाँधी बिहार पहुँचती है, जहाँ दशरथ भी जाता है। भाषण के दौरान स्टेज टूट जाता है जिसे दशरथ और कुछ लोग मिलकर संभाल लेते है, जिससे इंदिरा गाँधी अपना भाषण पूरा कर पाती है, इसके बाद दशरथ उनके साथ एक फोटो खिंचवाता है। जब यह बात वहां के जमीदार को पता चलती है, तो वह उसे अपनी मीठी बात में फंसाता है कि वह उसकी मदद करेगा सरकार से सड़क के लिए पैसे मांगने में, अनपढ़ दशरत उसकी बातों में आकर अगूंठा लगा देता है। लेकिन जब दशरत को इस बात का पता चलता है कि जमीदार ने उससे 25 लाख का चुना लगाया है, तो वह इसकी शिकायत प्रधानमंत्री से करने की ठान लेता है।

*बिहार से दिल्ली:*
दशरथ के पास 20 रूपए भी नहीं होते है ट्रेन के, जिस वजह से टीटी उसे ट्रेन से उतार देता है। लेकिन यह बात दशरत को रोक नहीं पाती और वह पैदल ही निकल पड़ता है।
दिल्ली में उस समय इमरजेंसी के चलते बहुत दंगे हो रहे होते है, दशरत जब पुलिस को अपनी इंदिरा गाँधी के साथ फोटो दिखाता है, तब उसे फाड़ कर वे उसे भगा देते है और प्रधान मंत्री से मिलने नहीं देते है।

*बिहार लौट आना:*
थक हार कर दशरत अपने घर लौट आता है, उसकी सारी उम्मीद टूट चुकी होती है, वह अब काफी बुढा भी हो गया होता है, उसकी हिम्मत जवाब देने लगती है। लेकिन कुछ लोग दशरथ का साथ देने के लिए आगे आते है और पहाड़ तोड़ने में मदद करते है। ये बात जब जमीदार को पता चलती है, तो वह उन सबको मार डालने की धमकी देता है और कुछ को गिरफ्तार करा देता है। लेकिन एक पत्रकार दशरथ के लिए मसीहा बन कर आता है और वह उसके लिए खड़े होता है। वह सभी गाँव वालों के साथ मिल कर दशरथ के लिए पुलिस स्टेशन के सामने विरोध करता है। दशरत को छोड़ दिया जाता है।

*1982 मे प्राप्त सफलता:*
360 फीट लम्बे, 30 फीट चौड़े व 25 फीट ऊँचे पहाड़ को दशरथ तोड़ने में सफल हो जाता है। 55 km लम्बे रास्ते को वह 15 km के रास्ते में बदल देता है। दशरत मांझी की बदौलत ही सरकार उस जगह पर ध्यान देती है और कार्य शुरू होता है।
1982 में दशरत की मेहनत रंग लाती है और पहाड़ टूट कर रास्ता बन जाता है।

2006 में दशरथ का नाम पद्म श्री के लिए दिया गया था।

*2007 म्रत्यु:*
17 अगस्त 2007 को दशरत की गाल ब्लाडर में कैंसर होने की वजह से दिल्ली में म्रत्यु हो जाती है।
मरने से पहले दशरत अपने जिंदगी पर फिल्म बनाने की अनुमति देकर जाता है। वह चाहता था उसकी यह कहानी से दुसरे भी प्रभावित होयें। बिहार सरकार ने इसके मरने पर राज्य शोक घोषित किया था।
2011 में उस सड़क को दशरथ मांझी पथ नाम दिया गया। ऐसे लोगों से हमें ज़िन्दगी में कभी हार ना मानने की शिक्षा मिलती है। दशरथ मांझी को हम सबका सलाम है।

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मेरी कोम || Mary Com

*मेरी कोम*

एक महिला खिलाड़ी जिन्होंने अपनी महान उपलब्धियों से भारत को गौरवान्वित किया है, ऐसी महान महिला का नाम है मेरी कोम, जो एक अकेली भारतीय महिला बॉक्सर है।
मेरी ने 2012 में हुए ओलंपिक में क्वालीफाई किया था, और ब्रोंज मैडल हासिल किया था। पहली बार कोई भारतीय बॉक्सर महिला यहाँ तक पहुंची थी। इसके अलावा वे 5 बार वर्ल्ड बॉक्सर चैम्पियनशीप जीत चुकी है।
मेरी ने अपने बॉक्सिंग करियर की शुरुवात 18 साल की उम्र में ही कर दी थी। मेरी कोम समस्त भारत के लिए प्रेरणा स्त्रोत है, इनका जीवन कई उतार चढ़ाव से भरा हुआ रहा। बॉक्सिंग में करियर बनाने के लिए इन्होने बहुत मेहनत की और अपने परिवार तक से लड़ बैठी थी।

*मेरी कोम का जीवन परिचय:*
मेरी कोम का पुरा नाम मांगते चुंगनेजंग मेरी कोम है। मेरी कोम का जन्म 1 मार्च 1983 में कन्गथेइ, मणिपुरी, भारत में हुआ था। इनके पिता एक गरीब किसान थे। ये चार भाई बहनों में सबसे बड़ी थी, कम उम्र से ही मेरी बहुत मेहनती रही है, अपने माता पिता की मदद करने के लिए वे भी उनके साथ काम करती थी। साथ ही वे अपने भाई बहनों की देखभाल करती थी।
मेरी ने इन सब के बाद भी पढाई की और इसकी शुरुवात ‘लोकटक क्रिस्चियन मॉडल हाई स्कूल’ से की, जहाँ वे 6th तक पढ़ी। इसके बाद संत ज़ेवियर कैथोलिक स्कूल चली गई, जहाँ से इन्होने कक्षा आठवीं की परीक्षा पास की। आगे की पढाई 9th and 10th के लिए वे आदिमजाति हाई स्कूल चली गई, किन्तु वे परीक्षा में पास नहीं हो पाई। स्कूल की पढाई मेरी ने बीच में ही छोड़ दी और आगे उन्होंने NIOS की परीक्षा दी। इसके बाद इन्होंने अपना ग्रेजुएशन चुराचांदपुर कॉलेज, इम्फाल (मणिपुर की राजधानी) से किया।

मेरी को बचपन से ही एथलीट बनने का शौक रहा, स्कूल के समय में वे फुटबॉल जैसे में हिस्सा लेती थी। लेकिन मजाक की बात यह है कि उन्होंने बॉक्सिंग में कभी भाग नहीं लिया था। सन 1998 में बॉक्सर ‘डिंगको सिंह’ ने एशियन गेम्स में गोल्ड मैडल जीता, वे मणिपुर के थे।
उनकी इस जीत से उनकी पूरी मातृभूमि झूम उठी थी। यहाँ मेरी ने बॉक्सिंग करते हुए डिंगको को देखा, और इसे अपना करियर बनाने की ठान ली। इसके बाद उनके सामने पहली चुनौती थी, अपने घर वालों को इसके लिए राजी करना। छोटी जगह के साधारण से ये लोग, बॉक्सिंग को पुरुषों का खेल समझते थे, और उन्हें लगता था इस तरह के गेम में बहुत ताकत मेहनत लगती है, जो इस कम उम्र की लड़की के लिए ठीक नहीं है।

मेरी ने मन में ठान लिया था कि वे अपने लक्ष्य तक जरुर पहुंचेंगी, चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी क्यों न करना पड़े। मेरी ने अपने माँ बाप को बिना बताये इसके लिए ट्रेनिंग शुरू कर दी। एक बार इन्होने ‘खुमान लम्पक स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स’ में लड़कियों को लड़कों से बॉक्सिंग करते देखा, जिसे देख वे स्तब्ध रे गई। यहाँ से उनके मन में उनके सपने को लेकर विचार और परिपक्व हो गए।
वे अपने गाँव से इम्फाल गई और मणिपुर राज्य के बॉक्सिंग कोच एम् नरजीत सिंह से मिली और उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए निवेदन किया। वे इस खेल के प्रति बहुत भावुक थी, साथ वे एक जल्दी सिखने वाली विद्यार्थी थी। ट्रेनिंग सेंटर से जब सब चले जाते थे, तब भी वे देर रात तक प्रैक्टिस करती रहती थी।

*मेरी कॉम का करियर:*
बॉक्सिंग शुरू करने के बाद मेरी को पता था कि उनका परिवार उनके बॉक्सिंग में करियर बनाने के विचार को कभी नहीं मानेगा, जिस वजह से उन्होंने इस बात को अपने परिवार से छुपा कर रखा था। 1998 से 2000 तक वे अपने घर में बिना बताये इसकी ट्रेनिंग लेती रही। सन 2000 में जब मेरी ने ‘वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप, मणिपुर’ में जीत हासिल की, और इन्हें बॉक्सर का अवार्ड मिला, तो वहां के हर एक समाचार पत्र में उनकी जीत की बात छपी, तब उनके परिवार को भी उनके बॉक्सर होने का पता चला।
इस जीत के बाद उनके घर वालों ने भी उनकी इस जीत को सेलिब्रेट किया। इसके बाद मेरी ने पश्चिम बंगाल में आयोजित ‘वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ में गोल्ड मैडल जीत, अपने राज्य का नाम ऊँचा किया।

• 2001 – सन 2001 में मेरी ने अन्तराष्ट्रीय स्तर पर अपना करियर शुरू किया। इस समय इनकी उम्र 18 साल मात्र थी। सबसे पहले इन्होने अमेरिका में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप, 48 kg वेट केटेगरी में हिस्सा लिया और यहाँ सिल्वर मैडल जीता।
• सन 2002 में तुर्की में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप, 45 kg वेट केटेगरी में मेरी विजयी रहीं और इन्होने गोल्ड मैडल अपने नाम किया। इसी साल मेरी ने हंगरी में आयोजित ‘विच कप’ में 45 वेट केटेगरी में भी गोल्ड मैडल जीता।
• 2003 – सन 2003 में भारत में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ में 46 kg वेट केटेगरी में मेरी ने गोल्ड मैडल जीता। इसके बाद नॉर्वे में आयोजित ‘वीमेन बॉक्सिंग वर्ल्ड कप’ में एक बार फिर मेरी को गोल्ड मैडल मिला।
• 2005 – सन 2005 में ताइवान में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ 46 kg वेट क्लास में मेरी को फिर से गोल्ड मैडल मिला। इसी साल रसिया में मेरी ने AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप भी जीती।
• 2006 – सन 2006 में डेनमार्क में आयोजित ‘वीनस वीमेन बॉक्स कप’ एवं भारत में आयोजित AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप में मेरी ने जीत हासिल कर, गोल्ड मैडल जीता।
• 2008 – एक साल का ब्रेक लेकर मेरी 2008 में फिर वापस आई और भारत में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ में सिल्वर मैडल जीता। इसके साथ ही AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप चाइना में गोल्ड मैडल जीता।
• 2009 – सन 2009 में वियतनाम में आयोजित ‘एशियन इंडोर गेम्स’ में मेरी ने गोल्ड मैडल जीता।
• 2010 – सन 2010 कजाखस्तान में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ में मेरी ने गोल्ड मैडल जीता, इसके साथ ही मेरी ने लगातार पाचंवी बार AIBA वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप में गोल्ड मैडल जीता। इसी साल मेरी ने एशियन गेम्स में 51 kg वेट क्लास में हिस्सा लेकर ब्रोंज मैडल जीता था। 2010 में भारत में कॉमनवेल्थ गेम्स का भी आयोजन हुआ था, यहाँ ओपनिंग सेरेमनी में विजेंदर सिंह के साथ मेरी कोम भी उपस्थित थी। इस गेम्स में वीमेन बॉक्सिंग गेम का आयोजन नहीं था, जिस वजह से मेरी यहाँ अपनी प्रतिभा नहीं दिखा सकीं।
• 2011 – सन 2011 में चाइना में आयोजित ‘एशियन वीमेन कप’ 48 kg वेट क्लास में गोल्ड मैडल जीता।
• 2012 – सन 2012 में मोंगोलिया में आयोजित ‘एशियन वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशीप’ 51 kg वेट क्लास में गोल्ड मैडल जीता। इस साल लन्दन में आयोजित ओलंपिक में मेरी को बहुत सम्मान मिला, वे पहली महिला बॉक्सर थी जो ओलंपिक के लिए क्वालिफाइड हुई थी। यहाँ मेरी को 51 kg वेट क्लास में ब्रोंज मैडल मिला था। इसके साथ मेरी तीसरी भारतीय महिला थी, जिन्हें ओलंपिक में मैडल मिला था।
• 2014 – सन 2014 में साउथ कोरिया में आयोजित एशियन गेम्स में वीमेन फ्लाईवेट (48-52kg) में मेरी गोल्ड मैडल जीता और इतिहास रच दिया।

*मेरी कोम पर्सनल लाइफ:*
मेरी की मुलाकात सन 2001 में ओन्लर से दिल्ली में हुई थी, जब वे पंजाब में नेशनल गेम्स के लिए जा रही थी। उस समय ओन्लर दिल्ली यूनिवर्सिटी में लॉ पढ़ रहे थे। दोनों एक दुसरे से बहुत प्रभावित हुए, चार साल तक दोनों के बीच दोस्ती का रिश्ता रहा, जिसके बाद सन 2005 में दोनों ने शादी कर ली। दोनों के तीन लड़के है, जिसमें से 2 जुड़वाँ बेटों का जन्म 2007 में हुआ था, एवं एक और बेटे का जन्म 2013 में हुआ।

*मेरी कॉम अवार्ड्स एवं अचीवमेंट:*
• सन 2003 में अर्जुन अवार्ड मिला।
• सन 2006 पद्म श्री अवार्ड मिला।
• सन 2007 में खेल के सबसे बड़े सम्मान ‘ राजीव गाँधी खेल रत्न’ के लिए नोमिनेट किया गया।
• सन 2007 में लिम्का बुक रिकॉर्ड द्वारा पीपल ऑफ़ दी इयर का सम्मान मिला।
• सन 2008 में CNN-IBN एवं रिलायंस इंडस्ट्री द्वारा ‘रियल हॉर्स अवार्ड’ से सम्मानित किया गया
• सन 2008 पेप्सी MTV यूथ आइकॉन
• सन 2008 में AIBA द्वारा ‘मैग्निफिसेंट मैरी’ अवार्ड।
• 2009 में राजीव गाँधी खेल रत्न दिया गया।
• सन 2010 में सहारा स्पोर्ट्स अवार्ड द्वारा स्पोर्ट्सवीमेन ऑफ़ दी इयर का अवार्ड दिया गया।
• सन 2013 में देश के तीसरे बड़े सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

*मेरी कोम फिल्म:*
मेरी कोम के जीवन पर आधारित फिल्म ‘मेरी कोम’ को ओमंग कुमार ने बनाया था, जिसे 5 सितम्बर 2014 में रिलीज़ किया गया था। फिल्म में मुख्य भूमिका में प्रियंका चोपड़ा थी, जिसमें उनकी अदाकारी देखने लायक थी।

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Saturday, 27 January 2018

कल की सोच रखने वाले ही कुछ बड़ा करते हैं. Safalta Aapki

कल की सोच रखने वाले ही कुछ बड़ा करते हैं.

कुंतालपुर का राजा बड़ा ही न्याय प्रिय था| वह अपनी प्रजा के दुख-दर्द में बराबर काम आता था| प्रजा भी उसका बहुत आदर करती थी| एक दिन राजा गुप्त वेष में अपने राज्य में घूमने निकला तब रास्ते में देखता है कि एक वृद्ध एक छोटा सा पौधा रोप रहा है| 

राजा कौतूहलवश उसके पास गया और बोला, ‘‘यह आप किस चीज का पौधा लगा रहे हैं ?’’ वृद्ध ने धीमें स्वर में कहा, ‘‘आम का|’’ 

राजा ने हिसाब लगाया कि उसके बड़े होने और उस पर फल आने में कितना समय लगेगा| हिसाब लगाकर उसने अचरज से वृद्ध की ओर देखा और कहा, ‘‘सुनो दादा इस पौधै के बड़े होने और उस पर फल आने मे कई साल लग जाएंगे, तब तक तुम क्या जीवित रहोगे?’’ वृद्ध ने राजा की ओर देखा| राजा की आँखों में मायूसी थी| उसे लग रहा था कि वह वृद्ध ऐसा काम कर रहा है, जिसका फल उसे नहीं मिलेगा| 

यह देखकर वृद्ध ने कहा, ‘‘आप सोच रहें होंगे कि मैं पागलपन का काम कर रहा हूँ| जिस चीज से आदमी को फायदा नहीं पहुँचता, उस पर मेहनत करना बेकार है, लेकिन यह भी तो सोचिए कि इस बूढ़े ने दूसरों की मेहनत का कितना फायदा उठाया है ? दूसरों के लगाए पेड़ों के कितने फल अपनी जिंदगी में खाए हैं ? क्या उस कर्ज को उतारने के लिए मुझे कुछ नहीं करना चाहिए? क्या मुझे इस भावना से पेड़ नहीं लगाने चाहिए कि उनके फल दूसरे लोग खा सकें? जो केवल अपने लाभ के लिए ही काम करता है, वह तो स्वार्थी वृत्ति का मनुष्य होता है|’’ 

वृद्ध की यह दलील सुनकर राजा प्रसन्न हो गया , आज उसे भी कुछ बड़ा सीखने को मिला था ! 

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Thursday, 7 April 2016

भगवान बुद्ध के अनमोल विचार

भगवान गौतम बुद्ध के अनमोल विचार / Gautam Buddha Quotes in Hindi

NameGautam Buddha / भगवान गौतम बुद्ध
Born563 BC or 623 BC Lumbini, today in Nepal
Died483 BC or 543 BC (aged 80)Kushinagar, today in India
Life of Gautam Buddha in Hindi
बुद्धं शरणम् गच्छामि
Quote 1 : All that we are is the result of what we have thought. If a man speaks or acts with an evil thought, pain follows him. If a man speaks or acts with a pure thought, happiness follows him, like a shadow that never leaves him.
In Hindi :हम जो कुछ भी हैं वो हमने आज तक क्या सोचा इस बात का परिणाम है. यदि कोई व्यक्ति बुरी सोच के साथ बोलता या काम करता है, तो उसे कष्ट ही मिलता है. यदि कोई व्यक्ति शुद्ध विचारों के साथ बोलता या काम करता है, तो उसकी परछाई की तरह ख़ुशी उसका साथ कभी नहीं छोडती.
Lord Buddha  भगवान गौतम बुद्ध 
Quote 2 :Better than a thousand hollow words, is one word that brings peace.
In Hindi :हजारों खोखले शब्दों से अच्छा वह एक शब्द है जो शांति लाये.
Lord Buddha  भगवान गौतम बुद्ध 
Quote 3 :All wrong-doing arises because of mind. If mind is transformed can wrong-doing remain?
In Hindi : सभी बुरे कार्य  मन के कारण उत्पन्न होते हैं. अगर मन परिवर्तित हो जाये तो क्या अनैतिक कार्य रह सकते हैं?
Lord Buddha  भगवान गौतम बुद्ध 
Quote 4: A jug fills drop by drop.
In Hindi : एक जग बूँद-बूँद कर के भरता है.
Lord Buddha  भगवान गौतम बुद्ध  
Quote 5 : Do not dwell in the past, do not dream of the future, concentrate the mind on the present moment.
In Hindi :अतीत पे ध्यान मत दो, भविष्य के बारे में मत सोचो, अपने मन को वर्तमान क्षण पे केन्द्रित करो.
Lord Buddha  भगवान गौतम बुद्ध  
Quote 6 :Health is the greatest gift, contentment the greatest wealth, faithfulness the best relationship.
In Hindi : स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ा धन है, वफ़ादारी सबसे बड़ा सम्बन्ध है.
Lord Buddha  भगवान गौतम बुद्ध
Quote 7 : Just as a candle cannot burn without fire, men cannot live without a spiritual life.
In Hindi :जैसे मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती, मनुष्य भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता.
Lord Buddha  भगवान गौतम बुद्ध
Quote 8 : Three things cannot be long hidden: the sun, the moon, and the truth.
In Hindi : तीन चीजें ज्यादा देर तक नहीं छुप सकती, सूरज, चंद्रमा और सत्य.
Lord Buddha  भगवान गौतम बुद्ध
Quote 9 :Work out your own salvation. Do not depend on others.
In Hindi :अपने मोक्ष के लिए खुद ही प्रयत्न करें. दूसरों पर निर्भर ना रहे.
Lord Buddha  भगवान गौतम बुद्ध
Quote 10 : You will not be punished for your anger, you will be punished by your anger.
In Hindi : तुम अपने क्रोध के लिए दंड नहीं पाओगे, तुम अपने क्रोध के द्वारा दंड पाओगे.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 11: An insincere and evil friend is more to be feared than a wild beast; a wild beast may wound your body, but an evil friend will wound your mind.
In Hindi : किसी जंगली जानवर की अपेक्षा एक कपटी और दुष्ट मित्र से अधिक डरना चाहिए, जानवर तो बस आपके शरीर को नुक्सान पहुंचा सकता है, पर एक बुरा मित्र आपकी बुद्धि को नुक्सान पहुंचा सकता है.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 12:Do not overrate what you have received, nor envy others. He who envies others does not obtain peace of mind.
In Hindi : आपके पास जो कुछ भी है  है उसे बढ़ा-चढ़ा कर मत बताइए, और ना ही दूसरों से इर्श्या कीजिये. जो दूसरों से इर्श्या करता है उसे मन की शांति नहीं मिलती.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 13:Hatred does not cease by hatred, but only by love; this is the eternal rule.
In Hindi : घृणा घृणा से नहीं प्रेम से ख़त्म होती है, यह शाश्वत सत्य है.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 14:He who loves 50 people has 50 woes; he who loves no one has no woes.
In Hindi : वह जो पचास लोगों से प्रेम करता है उसके पचास संकट हैं, वो  जो किसी से प्रेम नहीं करता उसके एक भी संकट नहीं है.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 15:Holding on to anger is like grasping a hot coal with the intent of throwing it at someone else; you are the one who gets burned.
 In Hindi : क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकडे रहने के सामान है; इसमें आप ही जलते हैं.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 16:However many holy words you read, however many you speak, what good will they do you if you do not act on upon them?
 In Hindi : चाहे आप जितने पवित्र शब्द पढ़ लें या बोल लें, वो आपका क्या भला करेंगे जब तक आप उन्हें उपयोग में नहीं लाते?
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 17:I never see what has been done; I only see what remains to be done.
In Hindi : मैं कभी नहीं देखता कि क्या किया जा चुका है; मैं हमेशा देखता हूँ कि क्या किया जाना बाकी है.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 18:Without health life is not life; it is only a state of langour and suffering – an image of death.
In Hindi : बिना सेहत के जीवन जीवन नहीं है; बस पीड़ा की एक स्थिति है- मौत की छवि है.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 19:What we think, we become.
In Hindi : हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 20:There is nothing more dreadful than the habit of doubt. Doubt separates people. It is a poison that disintegrates friendships and breaks up pleasant relations. It is a thorn that irritates and hurts; it is a sword that kills.
In Hindi : शक की आदत से भयावह कुछ भी नहीं है. शक लोगों को अलग करता है. यह एक ऐसा ज़हर है जो मित्रता ख़त्म करता है और अच्छे रिश्तों को तोड़ता है. यह एक काँटा है जो चोटिल करता है, एक तलवार है जो वध करती है.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 21 : There are only two mistakes one can make along the road to truth; not going all the way, and not starting.
In Hindi : सत्य के मार्ग पे चलते हुए कोई दो ही गलतियाँ कर सकता है; पूरा रास्ता ना तय करना, और इसकी शुरआत ही ना करना.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध
Quote 22 : In a controversy the instant we feel anger we have already ceased striving for the truth, and have begun striving for ourselves.
In Hindi : किसी विवाद में हम जैसे ही क्रोधित होते हैं हम सच का मार्ग छोड़ देते हैं, और अपने लिए प्रयास करने लगते हैं.
Lord Buddha  भगवानगौतम बुद्ध

नशा छोड़ें, घर जोड़ें


नशा ऐसी बीमारी है जो हमें,हमारे समाज को ,हमारे देश को तेजी से निगलते जा रही है आज शहर और गावों में पढ़ने खेलने की उम्र में स्कूल और कॉलेज के बच्चे एवं युवा वर्ग मादक पदार्थों के बाहुपाश में जकड़ते जा रहे हैं l
इस बुराई के कुछ हद तक जिम्मेदार हम लोग भी हैं हम अपने काम धंधों में इतना उलझ गए हैं कि हमें फुर्सत ही नहीं है ये जानने की कि हमारा बच्चा कहाँ जा रहा है, क्या कर रहा है कोई परवाह नहीं,बस बच्चों की मांगे पूरी करना ही अपनी जिम्मेदारी समझ बैठे हैं l
क्यों करते हैं लोग नशा –
कभी शौक के नाम पर तो कभी दोस्ती की आड़ में,कभी दुनियाँ के दुखों का बहाना करके तो कभी कोई मज़बूरी बताकर ,कभी टेंशन तो कभी बोरियत दूर करनेके लिए लोग शराब ,सिगरेट,तम्बाकू आदि अनेक प्रकार के मादक द्रव्यों का सेवन करते हैं लेकिन नशा कब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है उन्हें पता ही नहीं चलता, जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है l
नशे से नुकसान:
हिंसा,बलात्कार,चोरी,आत्महत्या आदि अनेक अपराधों के पीछे नशा एक बहुत बड़ी वजह है l शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए एक्सीडेंट करना, शादी शुदा व्यक्तियों द्वारा नशे में अपनी पत्नी से मारपीट करना आम बात हैl मुँह ,गले व फेफड़ों का कैंसर, ब्लड प्रैशर,अल्सर,यकृत रोग,अवसाद एवं अन्य अनेक रोगों का मुख्य कारण विभिन्न प्रकार का नशा है l

उपचार -नशा छोड़ने के लिए निम्न उपाय करें :
  • डायरी बनायें – नशा कब और कितनी मात्रा में लेते हैं लिखें l
  • विचार करें -आपके लिए आपका परिवार,बच्चे ,कैरियर और स्वास्थय कितनी अहमियत रखता है ,आपके नशा करने से इन चीजों पर कितना असर हो रहा है l
  • नशा छोड़ने से आपको क्या फायदे और क्या नुकसान होंगे एवं यदि आप नशा जारी रखते हैं तो आपके भविस्य पर क्या असर होगा ,गम्भीरता से विचार करें l 
  • पॉजिटिव रहें ,अपने आपको खेल कूद ,किताबें पड़ना,फ़िल्म देखना एवं गाने सुनना जैसी गतिविधियों में व्यस्त रखें ,अकेले ना रहें l
यदि इतने उपाय करने के बाद भी नशा छोड़ने में सफल न हों तो विशेषज्ञ एवं नशा मुक्ति केंद्र से राय लेना बेहतर होगा l
Dr. Manoj Gupta
Dr. Manoj Gupta
Dr.Manoj Gupta
C-1462,Ansal Palam Vihar,Gurgaon(Haryana)
Mob-09929627239
Email-drgupta178@gmail.com
Blog:drmanojgupta.blogspot.in (plz visit for Health Articles in Hindi)
Dr. Manoj Gupta is passionate about  spreading awareness on Health and Drug Addiction related issues. His articles have been published in Rajasthan Patrika and some other popular news papers. We wish him a great success in his noble endeavours.

Wednesday, 6 April 2016

दौड़ Hindi Story on Dealing With Problems

 एक दस वर्षीय लड़का रोज अपने पिता के साथ पास की पहाड़ी पर सैर को जाता था।
एक दिन लड़के ने कहा, “पिताजी चलिए आज हम दौड़ लगाते हैं, जो पहले चोटी पे लगी उस झंडी को छू लेगा वो रेस जीत जाएगा!”
पिताजी तैयार हो गए।
दूरी काफी थी, दोनों ने धीरे-धीरे दौड़ना शुरू किया।
कुछ देर दौड़ने के बाद पिताजी अचानक ही रुक गए।
“क्या हुआ पापा, आप अचानक रुक क्यों गए, आपने अभी से हार मान ली क्या?”, लड़का मुस्कुराते हुए बोला।
“नहीं-नहीं, मेरे जूते में कुछ कंकड़ पड़ गए हैं, बस उन्ही को निकालने के लिए रुका हूँ।”, पिताजी बोले।
लड़का बोला, “अरे, कंकड़ तो मेरे भी जूतों में पड़े हैं, पर अगर मैं रुक गया तो रेस हार जाऊँगा…”, और ये कहता हुआ वह तेजी से आगे भागा।

पिताजी भी कंकड़ निकाल कर आगे बढे, लड़का बहुत आगे निकल चुका था, पर अब उसे  पाँव में दर्द का एहसास हो रहा था, और उसकी गति भी घटती जा रही थी। धीरे-धीरे पिताजी भी उसके करीब आने लगे थे।
लड़के के पैरों में तकलीफ देख पिताजी पीछे से चिल्लाये,” क्यों नहीं तुम भी अपने कंकड़ निकाल लेते हो?”
“मेरे पास इसके लिए टाइम नहीं है !”, लड़का बोला और दौड़ता रहा।
कुछ ही देर में पिताजी उससे आगे निकल गए।
चुभते कंकडों की वजह से लड़के की तकलीफ बहुत बढ़ चुकी थी और अब उससे चला नहीं जा रहा था, वह रुकते-रुकते चीखा, “पापा, अब मैं और नहीं दौड़ सकता!”
पिताजी जल्दी से दौड़कर वापस आये और अपने बेटे के जूते खोले, देखा तो पाँव से खून निकल रहा था। वे  झटपट उसे घर ले गए और मरहम-पट्टी की।
जब दर्द कुछ कम हो गया तो उन्होंने ने समझाया,” बेटे, मैंने आपसे कहा था न कि पहले अपने कंकडों को निकाल लो फिर दौड़ो।”
“मैंने सोचा मैं रुकुंगा तो रेस हार जाऊँगा !”,बेटा बोला।

“ ऐसा नही है बेटा, अगर हमारी लाइफ में कोई प्रॉब्लम आती है तो हमे उसे ये कह कर टालना नहीं चाहिए कि अभी हमारे पास समय नहीं है। दरअसल होता क्या है, जब हम किसी समस्या की अनदेखी करते हैं तो वो धीरे-धीरे और बड़ी होती जाती है और अंततः हमें जितना नुक्सान पहुंचा सकती थी उससे कहीं अधिक नुक्सान पहुंचा देती है। तुम्हे पत्थर निकालने में मुश्किल से 1 मिनट का समय लगता पर अब उस 1 मिनट के बदले तुम्हे 1 हफ्ते तक दर्द सहना होगा। “ पिताजी ने अपनी बात पूरी की।
Friends, हमारी life ऐसे तमाम कंकडों से भरी हुई है, कभी हम अपने finance को लेकर परेशान होते हैं तो कभी हमारे रिश्तों में कडवाहट आ जाती है तो कभी हम साथ करने वाले colleagues से समस्या होती है।
शुरू में ये समस्याएं छोटी जान पड़ती है और हम इन पर बात करने या इनका समाधान खोजने से बचते हैं, पर धीरे-धीरे इनका रूप बड़ा हो जाता है… कोई उधार जिसे हम हज़ार रुपये देकर चुका सकते थे उसके लिए अब 5000 रूपये चाहिए होते हैं… रिश्ते की जिस कड़वाहट को हम एक सॉरी से दूर कर सकते थे वो अब टूटने की कगार पर आ जाता है और एक छोटी सी मीटिंग से हम अपने कलीग से जो confusion ख़त्म कर सकते थे वो work place politics में बदल जाता है।
समस्याओं को तभी पकडिये जब वो छोटी हैं वर्ना देरी करने पर वे उन कंकडों की तरह आपका भी खून बहा सकती हैं।

बाबासाहेब अम्बेडकर के बारे में 13 ऐसी बातें जो शायद आप नहीं जानते!


बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर का जीवन संघर्ष और सफलता की ऐसी अद्भुत मिसाल है जो शायद ही कहीं और देखने को मिले. Indian Caste System की बुराइयों के बीच जन्मे बाबासाहेब ने बचपन से ही उपेक्षा और असमानता का आघात झेला। कोई आम आदमी इन आघातों से कमजोर पड़ जाता पर बाबासाहेब तो कुछ अलग ही मिटटी के बने थे; इन आघातों ने उन्हें वज्र सा मजबूत बना दिया और अपनी असीम इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर उन्होंने एक आधुनिक भारत के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया।

Dr. B.R Ambedkar Interesting Facts in Hindi

बाबासाहेब बी आर अम्बेडकर के बारे में कुछ रोचक तथ्य 


Fact 1: भीमराव अंबेडकर अपने माता-पिता की चौदहवीं और आखिरी संतान थे।
Fact 2: डॉ. अंबेडकर के पूर्वज काफी समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी में एम्प्लोयेड थे और उनके पिता ब्रिटिश इंडियन आर्मी में Mhow cantonment में तैनात थे।
Fact 3: डॉ. अम्बेडकर का मूल या ओरिजिनल नाम था अम्बावाडेकर था। लेकिन उनके शिक्षक, महादेव अम्बेडकर, जो उन्हें बहुत मानते थे, ने स्कूल रिकार्ड्स में उनका नाम अम्बावाडेकर से अम्बेडकर कर दिया।
Fact 4: बाबासाहेब मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में दो साल तक प्रिंसिपल पद पर कार्यरत रहे।
Fact 5: डॉ. बी. आर अम्बेडकर भारतीय संविधान की धारा 370, जो जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देता है के खिलाफ थे।
Fact 6: बाबासाहेब अम्बेडकर विदेश जाकर अर्थशास्त्र डॉक्टरेट की डिग्री हासिल करने वाले पहले भारतीय थे।

Fact 7: डॉ. अम्बेडकर बाद के सालों में डायबिटीज से बुरी तरह ग्रस्त थे।
Fact 8: डॉ. अम्बेडकर ही एक मात्र भारतीय हैं जिनकी portrait लन्दन संग्रहालय में कार्ल मार्क्स के साथ लगी हुई है।
Fact 9: इंडियन फ्लैग में अशोक चक्र को जगह देने का श्रेय भी डॉ. अम्बेडकर को जाता है।
Fact 10: B R Ambedkar Labor Member of the Viceroy’s Executive Council के सदस्य थे और उन्ही की वजह से फैक्ट्रियों में कम से कम 12-14 घंटे काम करने का नियम बदल कर सिर्फ 8 घंटे कर दिया गया था।
Fact 11: वो बाबासाहेब ही थे जिन्होंने महिला श्रमिकों के लिए सहायक Maternity Benefit for women Labor, Women Labor welfare fund, Women and Child, Labor Protection Act जैसे कानून बनाए।
Fact 12: Economics का Nobel Prize जीत चुके अर्थशास्त्री प्रो. अमर्त्य सेन डॉ. बी आर अम्बेडकर को अर्थशाश्त्र में अपना पिता मानते हैं।

Fact 13: बेहतर विकास के लिए 50 के दशक में ही बाबासाहेब ने मध्य प्रदेश और बिहार के विभाजन का प्रस्ताव रखा था, पर सन 2000 में जाकर ही इनका विभाजन कर छत्तीसगढ़ और झारखण्ड का गठन किया गया।
क्या आप बाबासाहेब से सम्बंधित कुछ और रोचक तथ्य जानते हैं? यदि हाँ, तो कृपया कमेन्ट के माध्यम से हमसे शेयर करें।

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